डोंगरगढ़। चैत्र नवरात्र पर्व का समापन बुधवार की देर रातज्योति कलशों के विसर्जन के साथ होगा। राजनांदगांव जिलें के डोंगरगढ़ स्थित नीचे मां बम्लेश्वरी मंदिर सहित शहर के अन्य देवी मंदिरों की ज्योत महावीर तालाब में रात 12 बजें तक विसर्जित होगी। ज्योत विसर्जन के दौरान ट्रेनों को रोका जाएगा। मंगलवार को अष्टमी हवन किया गया। साथ ही बुधवार तड़के सुबह 4 बजें ऊपर मंदिर की माई ज्योत का विसर्जन हुआ। दोनों मंदिरों में अष्टमी हवन के बाद वर्षों से चली आ रही परम्परा का निर्वहन आज भी किया जा रहा है। नवरात्र पर्व का शुभारंभ होने पर नगर देवताओं का आव्हान करते हुए आमंत्रण व ज्योति कलशों का विसर्जन निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए उनके दर पर बैगा व पुजारी पहुंचते हैं। एक तरह से पूरें नगर का बंधनवार होता है। साल में दो बार चैत्र तथा क्वांर में नवरात्र पर्व आयोजित होती है। पर्व में आज भी बैगा विधि से पूजा-अर्चना होती है। पर्व की शुरुआत एकम से होती है। ज्योति प्रज्वलित करने से पहले बैगा व पुजारी पूजा-पाठ की सामग्री लेकर नगर (पहले ग्राम देवता) देवताओं का आव्हान करने के लिए निकलते हैं। उन्हें पर्व के लिए आमंत्रित करने की परम्परा सैकड़ो वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर में किसी भी आयोजन को निर्विघ्न सम्पन्न कराने के लिए नगर देवताओं का आव्हान करना आवश्यक है। डोंगरगढ़ पहले एक गांव की तरह था इसलिए ग्राम देवताओं के नाम से सभी का आव्हान किया जाता था।
यहां नगर देवताओं का आह्वान करने के बाद ही होता है ज्योति कलशों का विसर्जन। आवाजाही के दौरान थम जातें है ट्रेनों के पहिए
अप्रैल 17, 2024
इन नगर देवताओं का आह्वान कर लेते हैं अनुमति-
मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट के पुजारी व बैगा हवन होने के बाद ज्योति कलशों के विसर्जन की अनुमति लेने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। सबसे पहले रणचंडी मंदिर, ओवरब्रिज के नीचे हनुमान मंदिर, गोल बाजार का बैगा चौरा, पुराना बस स्टैंड का बैगा मंदिर, खूंटापारा का पंडरी पाठ, हरदेव लाल चौक का हरदेव लाल बाबा, दंतेश्वरी मंदिर, दंतेश्वरी मंदिर बैगा, शीतला मंदिर, सतबहिनी मंदिर होते हुए ऊपर मंदिर जाने से पहले सीढ़ियों में स्थित सभी मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हुए ऊपर मां बम्लेश्वरी देवी में अर्जी लगाकर ज्योति कलशों का विसर्जन किया जाता है।
महाराष्ट्र की शहनाई वादन की परंपरा आज भी चल रही-
नवरात्र पर्व की शुरुआत व समापन शहनाई वादन से होती है। शहनाई बजाने वालों की टीम महाराष्ट्र के सालेकसा से आती हैं। पर्व की शुरुआत से लेकर नवरात्र में आरती व विसर्जन के दौरान शहनाई वादन होती है। पूरे नौ दिनों तक शहनाई बजाने वाले कलाकार डोंगरगढ़ में रहकर सेवा देते हैं। ज्योति कलशों की शोभायात्रा निकलने से लेकर विसर्जन तक शहनाई निरंतर बजती है। शहनाई वादन की परम्परा भी वर्षों से मां बम्लेश्वरी मंदिर में चली आ रही है।
निकलेगी ज्योति कलशों की नयनाभिराम झांकी-
नीचे बम्लेश्वरी मंदिर सहित शहर के अन्य देवी मंदिरों के ज्योति कलशों का विसर्जन आज बुधवार की रात महावीर तालाब में होगी। नीचे मंदिर की नयनाभिराम झांकी पूर्व रुट के मुताबिक रेलवे ट्रैक से होते हुए शीतला मंदिर के सामने से गुजरेगी। इस दौरान नीचे मंदिर व शीतला मंदिर की माई ज्योत की भेंट होती है। भेंट के बाद ही ज्योत विसर्जन के लिए आगें बढ़ती है। यह परम्परा भी लम्बे समय से चली आ रही है।
पूर्व रुट से ही निकलेगी शोभायात्रा, ट्रेनों का स्टॉपेज होगा-
विसर्जन के दौरान आते व जाते समय ट्रेनों का स्टॉपेज किया जाएगा। दो साल पहलें पर्व में प्रशासन ने रूट बदलने का निर्णय लिया था लेकिन विरोध के चलते सफल नहीं हुए। ज्योति कलश उठाने के लिए बिल्ला का वितरण कर दिया गया है। सुहागन महिलाएं ही बाल खुलें कर ज्योति कलश उठाएगी। ट्रस्ट द्वारा ज्योतधारी महिलाओं को निशुल्क साड़िया दी जाती है।
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