गर्मी बढ़ने से नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में सैलानियों की संख्या घट चुकी है। मार्च के तीसरे सप्ताह में ही गिनती के सैलानी यहां पहुंच रहे हैं। जबकि जनवरी में 46 हजार 543 व फरवरी में 23 हजार 175 सैलानी यहां पहुंचे हैं। लगातार बढ़ रहे शहर के तापमान से मार्च में ही सैलानियों ने यहां आना कम कर दिया है। वहीं दूसरी ओर मुक्तांगन में पानी की कमी से फव्वारे बंद होने के साथ घास भी सूखने लगी है। करीब 200 एकड़ में फैले मुक्तांगन परिसर की देखरेख करने में विभाग के पसीने छूट रहे हैं।
बता दें कि रायपुर पुरखौती मुक्तांगन में पानी की कमी को दूर करने के लिए 43247.0 वर्गमीटर में झील का निर्माण किया जा रहा है जहां नौकायान चलाए जाने की भी योजना है। फिलहाल पानी के लिए विभाग जल संसाधन पर आश्रित है। ऐसे में विभाग भी खर्च कम करने के लिए कम पानी का उपयोग कर रहा है। पानी की कमी से मुक्तांगन परिसर में फव्वारे बंद पड़े हैं। वहीं गुफा के बाहर पानी के बड़े फव्वारे भी सूखे पड़े हैं। पुरखौती मुक्तांगन में प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी सैलानी पहुंचते हैं। सालभर में 72 विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचे हैं। 18 सितंबर 2023 को जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान यहां 16 हजार 762 लोग जुटे थे। वहीं सालभर में करीब 2 लाख 57 हजार 334 सैलानी यहां पहुंच चुके हैं। मुक्तांगन के कार्यालय व टिकट काउंटर के अनुसार सबसे ज्यादा सैलानी दिसंबर से जनवरी के बीच आते हैं। यहां सरगुजा और बस्तर क्षेत्रों की जनजाति के रहन-सहन, आदिवासी संस्कृति-सभ्यता की सुंदर झलक लोगों को भा रही है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पुरखौती मुक्तांगन में आए दिन पानी की कमी से जूझना पड़ता है। गर्मी में पानी की कमी से फव्वारे बंद करने पड़ते हैं। लोगों का भी यहां आना काफी कम हो जाता है। झील निर्माण पूरा होने के बाद पानी की नियमित आपूर्ति की जाएगी। हरियाली के लिए पेड़-पौधों, गार्डन में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इधर पानी की कमी से गर्मी के दिनों में परिसर सूनसान दिखाई देने लगा है। परिसर के घास भी सूखने लगे हैं। खासबात यह है कि यहां अयोध्या में तैयार किए गए भव्य राम मंदिर की प्रतिकृति तैयार की जाएगी। यह अयोध्या में बनाए गए राम मंदिर की हुबहू प्रतिकृति होगी। अयोध्या धाम की तर्ज पर कौशल्या माता धाम का भी विकास किया जाएगा जिसके लिए निर्माण कार्य चल रहा है।






