छत्तीसगढ़ में पहले माइक्रो बायोलॉजी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की शुरूआत

 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ के पहले माइक्रो बायोलॉजी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की शुरूआत की। राजधानी रायपुर में 4.33 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक प्रयोगशाला का निर्माण किया गया है। माइक्रो बायोलॉजी प्रयोगशाला शुरू होने से खाद्य पदार्थाे को दूषित करने वाले बैक्टीरिया, फंगस, यीस्ट, मोल्ड की जांच हो सकेगी। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि सरकार लोगों को गुणवत्ता पूर्ण सुरक्षित व पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 



प्रधानमंत्री मोदी ने राजकोट से राजधानी रायपुर के कालीबाड़ी स्थित माइक्रो बायोलॉजी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि ऐसे ही तेज गति से कार्यों से विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। बेहतर स्वास्थ्य की संकल्पना पूरी हो सके इसके लिए यह लैब खाद्य सुरक्षा के लिए एक कवच का काम करेगी। 

 



कार्यक्रम में विधायक रायपुर ग्रामीण मोतीलाल साहू, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य रेणु जी. पिल्ले, नियंत्रक खाद्य व औषधि प्रशासन दीपक सोनी, एमडी एनएचएम डॉ जगदीश सोनकर, आयुक्त नगर निगम अबिनाश मिश्रा, उप सचिव भारत सरकार पुलकेश, एफएसएसएआई के अधिकारी शरद राव और बड़ी संख्या में कर्मचारी अधिकारी उपस्थित रहे। आपको बता दें कि दिसंबर 2006 से कालीबाड़ी रायपुर स्थित नवीन भवन में खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला का संचालन किया जा रहा है। जिसमें आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा माइक्रो बायोलॉजी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की सौगात दी गई है। यह प्रयोगशाला खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण, नई दिल्ली की अतिरिक्त वित्तीय सहायता 4 करोड़ 33 लाख रुपए से तैयार की गई है। 


खाद्य पदार्थों में सूक्ष्म-जीवाणुओं की जांच होगी 

खाद्य पदार्थों व पेयजल को हानिकारक सूक्ष्म-जीवाणुओं द्वारा दूषित कर दिया जाता है, जिससे जन-सामान्य को कई तरह की बीमारियां होने की संभावना रहती है। खाद्य जनित बीमारियॉ जैसे उल्टी, डायरिया, टाईफाईड, बुखार, हैजा, त्वचा संबंधित बीमारियां आदि होती है। पूर्व में प्रयोगशाला में रासायनिक परीक्षण, हैवी मैटल, पेस्टीसाईड, विटामिन्स की परीक्षण होती थी, लेकिन माइक्रो बायोलॉजिकल मानकों की जांच नहीं होती थी। अब आधुनिक मशीनों से सुसज्जित माइक्रो बायोलॉजी प्रयोगशाला प्रारंभ होने से खाद्य पदार्थाे को दूषित करने वाले बैक्टीरिया, फंगस, यीस्ट, मोल्ड आदि की जांच हो सकेगी।





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