मैनपाट महोत्सव के अवसर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साइकिल रेस प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि का चेक प्रदान कर सम्मानित किया। मैनपाट महोत्सव 2024 के अवसर पर गुरुवार को जिला प्रशासन द्वारा साइकिल रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई थी।
साइकिल रेस प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग में बिलासपुर के दिव्यांशु सिंह ने पहला स्थान, रायगढ़ के उदित नारायण प्रधान ने दूसरा स्थान, रायगढ़ के अतुल प्रधान ने तीसरा स्थान हासिल किया है। वहीं महिला वर्ग में जशपुर की एलिजाबेथ बेक ने पहला स्थान, कटघोरा की अनुसुईया ने दूसरा स्थान और मानिक प्रकाशपुर की प्रियंका मिंज ने तीसरा स्थान हासिल किया। साइकिल रेस के विजेता प्रतिभागियों को जिला प्रशासन सरगुजा की ओर से 21 हजार, 11 हजार व 51 सौ रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अलावा 1100 रुपए का सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किया गया। इससे पहले साइकिल रेस की शुरूआत अम्बिकापुर के घड़ी चौक से जिला पंचायत अध्यक्ष मधु सिंह, नगर निगम अम्बिकापुर महापौर डॉ अजय तिर्की, कलेक्टर विलास भोस्कर, एसप विजय अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ नूतन कंवर ने हरी झंडी दिखाकर की। यह रेस घड़ी चौक अम्बिकापुर से शुरू होकर मैनपाट रोड नवापारा कला में समाप्त हुई। कुल 30 किमी की इस रेस में राज्य के अलग-अलग जिलों से आए 200 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और जीत के लिए दम लगाया।
कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मैनपाट की धरती में बसे तिब्बती बच्चों ने गेंहू, सत्तू और दूध से स्वागत किया। तिब्बती सेटलमेंट कम्यूनिटी की सेवान यांश, संबोध के साथ कक्षा तीसरी में पढ़ने वाले जेनॉलन व कक्षा दूसरी की छात्रा नेमसेल ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।
छत्तीसगढ़ के शिमला से पहचाना जाता है मैनपाट, प्राकृतिक संपदा के साथ यहां कई दर्शनीय स्थल
सुंदर वादियां, खुशनुमा वातावरण और ऊंची पहाड़ियों से घिरा, विभिन्न संस्कृतियों का संगम स्थल मैनपाट। जहां पहुंचते ही आपको अलौकिक शांति की प्राप्ति होती है। मैनपाट के नयनाभिराम दृश्य स्वतः ही सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां चारों ओर फैली हरियाली, घूमावदार पहुंचमार्ग, मन को असीम शीतलता प्रदान करने वाले जलप्रपात, अचंभित करने वाले प्राकृतिक दृश्य और दूर-दूर तक फैला पाट क्षेत्र है।
आपको बता दें कि मैनपाट विन्धपर्वत माला पर स्थित है जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 3781 फीट है। पर्वत की लम्बाई 28 किमी और चौड़ाई 10 से 13 किमी है। राजधानी रायपुर से अम्बिकापुर की दूरी लगभग 365 किमी है, वहीं अम्बिकापुर से मैनपाट की दूरी करीब 50 किमी है। यहां की जलवायु के कारण मैनपाट को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है। प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर यहां बौद्ध मंदिर, सरभंजा जल प्रपात, टाइगर प्वांइट, मछली प्वांइट प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। अम्बिकापुर से मैनपाट जाने के लिए दो रास्ते हैं पहला रास्ता अम्बिकापुर-सीतापुर मार्ग से होकर जाता और दूसरा ग्राम दरिमा होते हुए मैनपाट तक जाता है।
मैनपाट में पर्यटन को बढ़ावा देने और विकास को गति देने के लिए वर्ष 2012 में जिला प्रशासन सरगुजा द्वारा मैनपाट महोत्सव की शुरुआत की गई। अब हर वर्ष मैनपाट महोत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमें देश के नामी कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति, विभागीय स्टॉलों द्वारा विकास की झलक देखने को मिलती है। यहां एडवेंचर स्पोर्ट्स, नौकायन, पतंग फेस्ट, मेला, दंगल आदि गतिविधियां लोगों के मनोरंजन का माध्यम बनती हैं। इस वर्ष जिला प्रशासन द्वारा 23 से 25 फरवरी तक मैनपाट महोत्सव का आयोजन रोपाखार जलाशय के समीप किया जा रहा है। वैसे तो मैनपाट का मौसम वर्षभर खुशनुमा होता है पर नवम्बर से जनवरी के बीच सर्दियों के मौसम में मैनपाट की खूबसूरती और बढ़ जाती है। बारिश के बाद झरनों की सुंदरता, चारों ओर खेतों में लहराती हुई टाऊ की फसल दर्शनीय होती है। इसलिए ये मौसम मैनपाट में सैर करने के लिए सबसे अच्छा मौसम है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। राज्य के बाहर के सैलानी हवाई मार्ग, रेलमार्ग तथा सड़क मार्ग से भी रायपुर पहुंच सकते हैं। यहां रेलमार्ग से अम्बिकापुर पहुंचकर फिर सड़क मार्ग से मैनपाट जाया जा सकता है। मैनपाट पहुंचने के लिए टैक्सी एवं बस आसानी से यहां उपलब्ध हो जाते हैं। मैनपाट में रुकने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा निर्मित रिजॉर्ट शैला और करमा हैं। साथ ही यहां निजी होटल व रिसॉर्ट भी हैं जहां पर्यटक अपनी सुविधा अनुसार ठहर सकते हैं।
मैनपाट के प्रमुख पर्यटन स्थल
बौद्ध मंदिर
मैनपाट से ही रिहन्द व मांड नदी का उद्गम हुआ है। इंडो-चाइना वार के बाद 1962-63 में तिब्बती शरणार्थियों को मैनपाट में बसाया गया। यहां तिब्बती लोगों का जीवन व बौद्ध मंदिर आकर्षण का केन्द्र है। इसलिए इसे मिनी तिब्बत भी कहा जाता है।
टाइगर प्वाइंट
मैनपाट के महत्वपूर्ण प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट में टाइगर प्वाइंट का अपना विशेष महत्व है। टाइगर प्वाइंट एक खूबसूरत प्राकृतिक झरना है जिसमें पानी इतनी तेजी से गिरता है कि शेर के गर्जना जैसी आवाज आती है। चारों तरफ घनघोर जंगलों के बीच पहाड़ से गिरता झरना बहुत ही आकर्षक लगता है।
उल्टापानी
मैनपाट के बिसरपानी गांव में स्थित उल्टापानी छत्तीसगढ़ की सबसे ज्यादा अचंभित और हैरान करने वाला दर्शनीय स्थल है। यहां पर पानी का बहाव नीचे की तरफ न होकर ऊपर यानी ऊंचाई की ओर होता है। यहां सड़क पर खड़ी न्यूट्रल चार पहिया गाड़ी 110 मीटर तक गुरूत्वाकर्षण के विरूद्ध पहाड़ी की ओर लुढ़कती है।
जलजली
मैनपाट में प्रकृति के नियमों से दूर जलजली वह पिकनिक स्पॉट है जहाँ दो से तीन एकड़ जमीन काफी नर्म है और इसमें कूदने से धरती गद्दे की तरह हिलती है। आसपास के लोगों के अनुसार कभी यहां जल स्त्रोत रहा होगा जो समय के साथ ऊपर से सूख गया पर आंतरिक जमीन दलदली रह गई।
फिश प्वाइंट
मैनपाट में पर्यटकों के लिए जंगलों के बीच एक रोमांचकारी और मन को लुभाने वाला मशहूर जगह फिश प्वाइंट (मछली) स्थित है। यह भी एक जलप्रपात है।
मेहता प्वाइंट
मैनपाट में स्थित मेहता प्वाइंट ऊंची पहाड़ियां, गहरी घाटियां और वन मनोरम दृश्यों से भरपूर है। मैनपाट आने वाले पर्यटक सुंदर व्यू का आनंद लेने के लिए इस पिकनिक स्पॉट में अवश्य पहुंचते हैं।
ठिनठिनी पत्थर
अम्बिकापुर से 12 किमी की दूरी पर दरिमा हवाई अड्डा है। दरिमा हवाई अड्डा के पास बड़े-बड़े पत्थरों का समूह है। इन पत्थरों को किसी ठोस चीज से ठोकने पर आवाजें आती हैं। सर्वाधिक आश्चर्य की बात यह है कि यह आवाज विभिन्न धातुओं की आती है। इनमें से किसी-किसी पत्थर से खुले बर्तन को ठोकने के समान आवाज आती है। इन पत्थरों मे बैठकर या लेटकर बजाने से भी इसके आवाज में कोई अंतर नहीं पडता है। एक ही पत्थर के दो टुकड़े अलग-अलग आवाज पैदा करते हैं। इस विलक्षणता के कारण इस पत्थरों को अंचल के लोग ठिनठिनी पत्थर कहते हैं। इसके अतिरिक्त यहां बूढ़ा नागदेव जलप्रपात है जिसे जलपरी प्वाइंट भी कहते है। प्रकृति की गोद में बसे इस जलप्रपात तक पहुंचते ही सारी थकान दूर हो जाती है।


