साल 2023-2024 में अप्रैल से अब तक 400 मरीजों के आंखों की मोतिया बिंद का ऑपरेशन किया जा चुका है व आंखों की गंभीर बीमारी ग्लूकोमा, नाखूना, कॉर्नियल रिपेयर व चैलेजियान के 15 मरीजों का भी ऑपरेशन किया गया। स्कूलों में पहुंचकर नेत्र रोग सहायक वीरेंद्र साहू व बीएमओ बलवंत सिंह के द्वारा बच्चों के आंखों की जांच कर चश्मा का निशुल्क वितरित किया जा रहा है व आंखों की सुरक्षा व देखभाल कैसे करनी चाहिए इसकी भी समझाइश दी जाती है। डॉ बलवंत सिंह ने बताया कि आंखों का इलाज पटना अस्पताल द्वारा पूर्णत: निशुल्क किया जाता है, सभी को आंखों की जांच समय-समय पर करवाते रहना चाहिए। धुंधला दिखना, नजर कमजोर होना, दिखाई देना बंद हो जाना, रोशनी के आसपास छल्ले दिखाई देना ये सब मोतियाबिंद के लक्षण हैं।
खाना बदोष लोगों का भी हुआ आपरेशन
पूरे भारत में घूम-घूम कर तंबू में रहकर जड़ी बूटी बेचने वाले 70 वर्षीय कमर सिंह, 65 वर्षीय अनार कली पति नत्थू सिंह को बिलकुल कम दिखाई देता था। वे अलग-अलग जगह पर तम्बू में रहकर जड़ी बूटी बेचकर अपने परिवार के साथ गुजर बसर कर रहे हैं। दोनों को मालूम चला कि पटना में आंखों की जांच व ऑपरेशन निशुल्क होता है, तब दोनों पटना अस्पताल पहुंचे और वहां मौजूद डॉक्टर बलवंत सिंह ने आंखों की जांच की तब पता चला कि मोतिया बिन्द पूरी तरह से पका हुआ है। दोनों के पास किसी प्रकार का स्वास्थ्य कार्ड नहीं था, इसके बाद भी बीएमओ डॉ बलवंत सिंह ने दोनों का सफल ऑपरेशन किया, साथ ही उन्हें निशुल्क चश्मा दिया गया।
टोसिस बीमारी का भी हुआ इलाज
अमहर की 55 वर्षीय राधा पति भोला प्रसाद की पलक बंद हो जाती थी तो खुलती नहीं थी, वह इस बीमारी से काफी परेशान थी, उसे पता चला कि पटना में आंख के डाक्टर हैं तो वह पटना अस्पताल पहुंची। डॉ बलवंत सिंह ने बताया कि यह टोसिस नामक बीमारी है। इसका इलाज मेडिकल कॉलेज बिलासपुर या रायपुर में होता है। महिला आर्थिक तंगी को कारण इलाज कराने नहीं जा सकी, इसलिए उसका यहीं इलाज हुआ और ऑपरेशन सफल रहा। महिला ने कहा कि बिलासपुर या रायपुर जाकर इलाज कराने में काफी खर्च आता।
रनई की छात्रा का कार्निया रिपेयर हुआ रनई के विजय साहू की कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली बेटी की आंख में पेंसिल लगने के कारण आंख का कार्निया फट गया था जिसका डॉ बलवंत ने पटना अस्पताल में निशुल्क इलाज हुआ। बाहर जाकर इलाज कराने पर 15 से 20 हजार रुपए खर्च आता।

.jpg)

