घूमने के साथ ही प्रकृति का आनंद लेना हो तो कोरिया की ये जगह हैं बेस्ट

Tourist place in North Chhattisgarh उत्तर छत्तीसगढ़ के पर्यटन, धार्मिक स्थल और घूमने की जगह 

विभाजित कोरिया जिले में धार्मिक व दर्शनीय स्थलों की भरमार है। जब पर्यटन दृष्टिकोण से कोरिया की बात होती है तो यहां प्रसिद्ध मंदिर प्राकृतिक सुंदरता को और रमणीय बना देते हैं। इस लेख के माध्यम से हम आपको प्रमुख मंदिर और धार्मिक स्थलों की जानकारी दे रहे हैं जहां आप परिवार के साथ घूमने आ सकते हैं।

महामाया मंदिर चनवारीडांड : खड़गवां  
 


खड़गवां में चनवारीडांड शक्ति पीठ महामाया मंदिर प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। माना जाता है कि सरगुजा के राजा बिलासपुर रतनपुर स्थित मां महामाया की एक प्रतिमा लेकर जब सरगुजा जा रहे थे तब वह इस स्थल पर रूके थे। ग्राम वासी बताते हैं कि जिस स्थान पर मां की मूर्ति स्थापित है वहां राजा ने एक रात मां की मूर्ति को रखा था। इसके बाद राजा ने अंबिकापुर में मां महामाया की मूर्ति की स्थापना करवाई। 

                                      

यहां मां महामाया के भव्य मंदिर के साथ ही भोले नाथ का मंदिर तैयार है। इसके साथ ही यहां पर दक्षिणाभिमुखी श्री हनुमान मंदिर, भैरव बाबा मंदिर है। चैत्र नवरात्र में यहां मेला लगता है। साथ ही बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।


भगवान जगन्नाथ मंदिर : पोड़ी 


भगवान जगन्नाथ का मंदिर चिरमिरी के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में है। मंदिर उत्कल समाज ने बनवाया है। यह पवित्र स्थान वेस्ट चिरमिरी पोड़ी में स्थित है। रेलवे स्टेशन चिरमिरी से मंदिर की दूरी 6 किमी है। मंदिर की मुख्य विशेषता यह है कि इसकी स्थापत्य कला ओडिशा के पुरी जगन्नाथ से मिलती जुलती है। 



महाशिवरात्री के शुभ अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। यह मेला जिलेवासियों के लिए मुख्य आकर्षण का केन्द्र होता है। यह मेला तीन दिनों तक चलता है। वहीं श्री जगन्नाथ रथ यात्रा पर भी बड़ी संख्या में भक्त रथयात्रा में शामिल होते हैं।


गोरखनाथ गुफा मंदिर: गोदरीपारा 



यह एक प्राचीन मंदिर है, जो कि गुफा के अंदर स्थित है। इसे गोरखनाथ गुफा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान गोरखनाथ, श्री हरि विष्णु, भोलेनाथ का मंदिर ऊपर बना हुआ है। 


यह मंदिर भी उत्कल समाज द्वारा स्थापित है। यहां महाशिवरात्रि के आसपास रूद्र महायज्ञ का आयोजन होता है। जिसमें ओडिशा से पुराेहित शामिल होते हैं। मंदिर के गुफा में प्रवेश करते समय बड़ा रोमांचक लगता है।

वर्षा ऋतु के समय पत्थरों से धीरे-धीरे पानी टपकता जिसे देखने में आनंद आता है। गुफा के अंदर पत्थरों पर देवी-देवताओं की आकृति देखने को मिलेगी। यहां माँ काली, देवी लक्ष्मी, माँ सरस्वती की मूर्तियां स्थापित है।  


सिद्ध बाबा धामः मनेन्द्रगढ़ 


मनेन्द्रगढ़ के दक्षिण में प्रसिद्ध सिद्ध बाबा धाम है। यहां पर काफी संख्यों में श्रद्धालु  जिले व उसके आसपास क्षेत्रों से पहुँचते हैं। यह एक सिद्ध स्थान है। पहाड़ी के ऊपर स्थित शिव मंदिर का भी अपना विशेष महत्व है। क्षेत्र मनेंद्रगढ़ के ग्राम पंचायत चनवारीडांड अन्तर्गत आता है। सिद्ध बाबा पहाड़ी को लेकर पुराने समय से कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। यही वजह है कि रोजाना यहां भक्तों का ताता लगा रहता है। यहां पर प्रतिवर्ष शिवरात्री के शुभ अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है। सिद्ध बाबा सेवा समिति के सदस्यों ने आपसी सहयोग से यहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई है। 

कालीबाड़ी मंदिर : हल्दीबाड़ी 



कालीबाड़ी मंदिर चिरमिरी रेलवे स्टेशन के पास स्थित है। मंदिर निर्माण में बंगला समाज का मुख्य योगदान है। यहां बंगाली रीति रिवाज के साथ माँ की पूजा होती है। अमावस्या, दीपावली काली पूजा की रात मंदिर में भक्तों की भीड़ होती है। चैत्र नवरात्र पर भक्तों का कतार लगा रहता है। रेलवे स्टेशन चिरमिरी से दूरी मात्र 1 किमी है।  

जय धारी माँ काली मंदिर : बैगापारा बरतुंगा 


बैगापारा में काली माता का मंदिर है, जो कि धार्मिक व दर्शनीय स्थल है। परिसर में सांई बाबा, हनुमान जी, भोले नाथ और भैरव बाबा का मंदिर स्थापित है। यहां पर नवरात्रि के पावन पर्व पर भक्तों की कतार लगी रहती है। 

मंदिर बड़ा बाजार और बरतुंगा के मध्य स्थित है। दरअसल बैगापारा पहले एक गांव हुआ करता था। यहां धीरे-धीरे बैगा जनजाति की संख्या कम होती गई। इनका रहन-सहन का तरीका आज भी पुराने समय की तरह है। 

 


माई की बगीया : हल्दीबाड़ी  

चिरमिरी शहर के मध्य में हीरागिर पंचवटी पहाड़ के पास माई की बगीया का मंदिर है। प्रारंभ में यहां स्थानीय लोग पूजा करते थे लेकिन वर्तमान समय में यहां पर मां काली का सुन्दर मंदिर व माई की बगीया का निर्माण किया गया है जो भक्तों को अनायस आपनी ओर आकर्षित करता है। पास में गूफा मंदिर बना है जिसमें भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित है। नवरात्रि, शिवरात्री पर भक्तों की भीड़ रहती है। 



कोरिया जिले में पर्यटन के बढ़ते कदम 

मैं कोरिया जिला के हसीन वादियों, खूबसूरत पर्यटन स्थलों को करीब 17 वर्षों से देखता आ रहा हूं। साथ ही पर्यटन का छात्र भी रहा हूं। अविभाजीत कोरिया जिले की अपनी संस्कृति, परंपराएं व जीवन शैली है। जिले की प्राकृतिक सुंदरता, पुरातत्व, स्मारक, जलाशय लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।  

अश्विनी कुमार पाण्डेय

चिरमिरी, छत्तीसगढ़

ashwinichrm@gmail.com 

(लेखक GGU से टूरिज्म पोस्ट ग्रेजुएट हैं)


फोटो : प्रकाश देबनाथ, अमित पाण्डेय 

आभार : BFC Publication 

कोरिया में पर्यटन के बढ़ते कदम पर अधिक जानकारी के लिए BFC Publication की अश्विनी कुमार पाण्डेय द्वारा लिखित पुस्तक का अध्ययन कर सकते हैं। पुस्तक खरीदने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

https://amzn.eu/d/3exSgOj


To Top