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| चाइल्ड वार्ड में भर्ती बच्ची की जांच करते हुए डॉक्टर |
कोरिया जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने पीलिया से गंभीर बच्ची की जान बचाई। 10 साल की बच्ची में पीलिया संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच गया था, बच्ची को दौरे पड़ने लगे थे।
ग्राम पोटेडांड के अमरजीत की 10 साल की बेटी ममता पीलिया और बुखार से पीड़ित थी। 25 अगस्त को परिजन उसे बेहोशी की हालत में लेकर अस्पताल पहुंचे थे। ओपीडी से डॉक्टर ने बच्ची को तत्काल चाइल्ड वार्ड में भर्ती कराया। जहां अस्पताल के अन्य डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की देखरेख में इलाज शुरू हुआ। ब्लड जांच में पता चला कि बच्ची के शरीर में संक्रमण अधिक बढ़ा हुआ है और शरीर से बढ़कर संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच गया है।
पीलिया मस्तिष्क में पहुंचने से केस जटिल बना : बच्ची को हेपेटिक एन्सेफेलोपैथी बीमारी थी। इसमें ब्लड से पीलिया मस्तिष्क तक पहुंच गया था जिससे केस काफी जटिल हो गया था। पांच दिन बेहोश रहने के बाद उसके हालत में सुधार आया और वह होश में आ गई। शरीर में खून की काफी कमी थी। हीमोग्लोबिन 5.09 था। उपचार में दो यूनिट ब्लड चढ़ाया। यह स्थिति जानलेवा थी। -- डॉ भास्कर दत्त मिश्रा, शिशुराेग विशेषज्ञ
"25 अगस्त को परिजन बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। बच्ची बेहोश थी उसे मिर्गी के लक्षण आने लगे थे। चाइल्ड वार्ड में नर्सिंग स्टाफ मौजूद थे। डॉ भास्कर, डॉ पल्लवी छुट्टी पर थे। ऐसे में फोन कॉल पर डॉक्टर से सलाह लेकर बच्ची का इलाज शुरू किया। बच्ची का पीलिया काफी बढ़ा हुआ था। -- मोहर मनिया कुशवाहा, स्टाफ नर्स
पीलिया से बचाव साफ पानी सादा भोजन और सफाई
खान-पान में सादगी, साफ-सफाई और पीने के लिए शुद्ध पानी का इस्तेमाल पीलिया को रोक सकता है। पीलिया का तुरंत इलाज शुरू होना व मरीज के मामले में अत्यधिक सतर्कता पीलिया को घातक होने से बचा सकता है। डॉक्टरों ने बताया कि पीलिया में फीवर और बेहोशी को नजरअंदाज नहीं करें।



